आशातीत

सामान्य

तेज हवा के झोंको में बैठा, जब पत्तियों को इनके साथ उड़ते देखता हूँ;

सोचता हूँ काश !

पत्तियों की तरह हवा के साथ मैं भी उड़ पाता |

 

चांदनी रात में खामोश बैठा, जब धरती को रौशनी में नहाये देखता हूँ,

सोचता हूँ काश !

ऐसी ही धवल उज्ज्वलता मैं भी सबको दे पाता |

 

राहों में जब चलते-चलते वृक्षों को मदमस्त हो लहराते देखता हूँ,

सोचता हूँ काश !

सभी ग़मों को भूल ख़ुशी में, मैं भी ऐसे ही लहरा पाता |

 

राह के अँधेरे में जब आसमान में तारों को टिमटिमाते देखता हूँ,

सोचता हूँ काश !

इस बोझिल जिंदगी का चोला उतार, मैं भी आसमान में टिमटिमा पाता |

 

सोती-जागती आँखों से जब, कई सुनहरे और चल सपने देखता हूँ,

सोचता हूँ काश !

सपनों कि मानिंद जिंदगी को भी, ऐसे ही साकार कर पाता |

 

नज़रों के सामने झुरमुठों में, पक्षियों को जब किलोलें करते देखता हूँ,

सोचता हूँ काश !

अपना भी जीवन इनकी तरह, चंद लम्हों का खुशियों से भरा हो पाता |

 

निर्जीव-सा पड़ा हुआ, आँखों को मूँद सुन्या में देखता हूँ,

सोचता हूँ काश !

खुद में भी ऐसी शक्ति होती कि आशातीत कि आशा कभी न कर पाता |

 

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