नए साल में

सामान्य
( सभी पंक्तियों का पहला अक्षर मिलाने पर “नया साल सबके लिए सुखद एवं मंगलमय हो” )


वरंग सी उमंग लिए,
या आसमान के जैसे खुले विचार;
सागर से भी गहरी सोच या,
श्कर लिए ख़ुशी का, गम दरकिनार|
रस कर इन चार लम्हों को,
रसती सावन की बूंदों का झार;
केंद्र में लिए लक्ष्य को अपने,
लिख दे हर दिल में बस प्यार ही प्यार|
क अकेला चल पथ में,
सुप्त पद जाये गर ये संसार;
बर दे सबको बस खुशियों भरा,
वा बन सबका, लगा दे पार|
कल व्यक्तित्व गर धाह भी जाये,
वंदन और पूजन न हो तार-तार;
मंगल पथ में कर मगल कर्म,
र आ भी जाये दुखते आसार|
य पर सीधा चलते चल,
र्म तब जानेगा जीवन के चार;
ह मान ले पथ में सिर्फ कांटें नहीं हैं,
होगा भला करले भला अपार|
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4 responses »

  1. pradeep ji aapki kavita padhi aur sahi batoon ya galat jhooth bolne ki aadat nahi hai aur na hi chaploosi aati hai abhivyakti sundar hai aap apne jin bhavon ko itni khoobi se vyakt kar rahe hain main bhi usme saksham nahi hoon,lage rahiye kavita me aur nikhar aayega..mere kaushal.kanoni gyan blog par bhi aayen…

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